June 1, 2026

बांध सुरक्षा के महत्व, अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार पर दिया जोर

– बांधों में रिसाव का आंकलन एवं प्रबंधन पर आईआईटी रुड़की में चार दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम किया जा रहा आयोजित
– प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों एवं संगठनों के 25 प्रतिनिधि कर रहे हैं प्रतिभाग

रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में अंतरराष्ट्रीय बांध उत्कृष्टता केंद्र (आइसीईडी) के माध्यम से “बांधों में रिसाव का आंकलन एवं प्रबंधन” विषय पर अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। चार दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांध सुरक्षा के महत्व, इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार और तकनीकी चर्चाओं पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों एवं संगठनों के 25 प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं।
आइआइटी रुड़की में चार दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अध्यक्ष इंजीनियर मनोज त्रिपाठी ने किया। उन्होंने बांध सुरक्षा प्रथाओं को बढ़ाने में ज्ञान साझा करने और तकनीकी चर्चाओं के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के व्यावसायिकों के लिए रिसाव से संबंधित चुनौतियों और समाधानों पर सार्थक बातचीत करने के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में कार्य करेगा। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने सतत जल संसाधन प्रबंधन में बांध सुरक्षा के महत्व और इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार पर जोर दिया। जबकि आइसीईडी के प्रमुख प्रोफेसर एमएल शर्मा ने बांध सुरक्षा अनुसंधान में अंतःविषय सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम जैसी ज्ञान-साझा पहल लचीले और सुरक्षित जल बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक है।

आइसीईडी के संस्थापक प्रमुख प्रोफेसर एनके गोयल ने बांध सुरक्षा में निरंतर नवाचार एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए रिसाव अनुसंधान एवं प्रबंधन रणनीतियों में आइसीईडी के महत्वपूर्ण योगदान पर विचार रखे। पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर बृजेश कुमार यादव ने सीपेज प्रबंधन रणनीतियों के बारे में जानकारी दी। बांध सुरक्षा एवं पुनर्वास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को सीपेज मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में तार्किक सोच और तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रिप कार्यान्वयन एजेंसियों, राज्य एवं केंद्रीय जल संसाधन विभागों, एनटीपीसी लिमिटेड, एनएचपीसी लिमिटेड, टीएचडीसीआईएल, एसजेवीएनएल, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, केएसईबी, नीपको एवं मेघालय राज्य विद्युत बोर्ड सहित प्रमुख विद्युत क्षेत्र संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 25 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

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