June 1, 2026

मानव जीवन स्तर में सुधार लाया विज्ञान : डा. गोयल

– सीबीआरआइ रुड़की में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह का किया गया आयोजन
– संस्थान की ओर से विकसित प्रौद्योगिकियों का किया गया प्रदर्शन

 

रुड़की: केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह मनाया गया। समारोह के दौरान संस्थान ने विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। वहीं विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व हेतु भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना विषय पर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसके अलावा “एक स्वास्थ्य, एक विश्व” और जलवायु अनुकूल भवन डिजाइन दिशा-निर्देश विवरणिका का विमोचन भी हुआ।
सीबीआरआइ रुड़की के रवींद्र नाथ टैगोर सभागार में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आयोजित समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के निदेशक डा. एमके गोयल और संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर प्रदीप कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डा. एमके गोयल ने भारतीय विज्ञान और अनुसंधान के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन स्तर में सुधार लाया है।
उन्होंने विज्ञानियों के योगदान को याद करते हुए जनहित में विज्ञान का अधिकाधिक प्रयोग करने पर जोर दिया। सीबीआरआइ के निदेशक प्रो. आर प्रदीप कुमार ने विज्ञान एवं नवाचार के बढ़ते प्रभाव के बारे में विचार रखे। निदेशक ने संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित दो नवीन तकनीकों का लोकार्पण भी किया। इस दौरान गुणवत्ता ऑडिट डैशबोर्ड ‘प्रहरी’ और बाल विद्या मंदिर स्कूल में नए भवन का उद्घाटन भी किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डा. प्रकाश चंद्र थपलियाल, डा. अजय चौरसिया, एसके नेगी, डा. राजेश कुमार, डा. हेमलता, डा. किशोर, आशीष, चंद्रभान पटेल आदि उपस्थित रहे।

गर्म पानी की उपलब्धता को बनाएगा अधिक टिकाऊ और किफायती

रुड़की: सीबीआरआइ रुड़की के वैज्ञानिक डा. चन्दन स्वरूप मीना ने ऊर्जा-कुशल सौर-सहायता प्राप्त ऊष्मा पम्प वॉटर हीटर के बारे में बताते हुए कहा कि यह गर्म पानी की उपलब्धता को अधिक
टिकाऊ और किफायती बनाएगा। उन्होंने बताया कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पारंपरिक जल हीटिंग प्रणालियाां ऊर्जा की दृष्टि से अत्यधिक खपत करने वाली होती हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सीबीआरआइ ने अत्यधिक मौसम परिस्थितियों के लिए एक समाधान प्रस्तुत किया है। जैसे कि लेह-लद्दाख, सियाचिन, हिमाचल, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र। यह प्रणाली अत्यधिक ठंडे पर्यावरण तापमान (10℃ से -25℃ तक) से गर्मी निकाल सकती है। डा. चन्दन स्वरूप मीना ने बताया कि यह तकनीक बिजली की खपत को 60 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक कम कर सकती है। जो स्थान और साइट के आधार पर इलेक्ट्रिक गीजरों की तुलना में होती है। इसे एक बार निवेश के रूप में स्थापित किया जा सकता है। जिसके बाद यह लंबी अवधि के लाभ और पर्याप्त बिजली बचत प्रदान करती है। बढ़ती हुई बिजली की लागत और जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन पर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के साथ यह नवाचारी तकनीक एक स्थिर समाधान पेश करती है। जो जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करती है। इसके अलावा इसका कम-कार्बन फुटप्रिंट और घटित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन इसे पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार समाधान बनाता है। जो भारत के नवीनीकरणीय ऊर्जा और स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप है।

उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए स्थायी-किफायती मड ब्लॉक मशीन

संस्थान के वैज्ञानिक डा. रवींद्र बिष्ट ने उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए मड ब्लॉक मशीन के बारे बताते हुए कहा कि यह मशीन तकनीक दूरस्थ, पहाड़ी और कठोर भूभागों में निर्माण से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक स्थायी और किफायती समाधान प्रदान करती है। यह मशीन एक यांत्रिक उत्पादन प्रणाली का उपयोग करती है। जो प्रति बैच दो ब्लॉक तैयार करती है। केवल दो ऑपरेटरों के साथ एक शिफ्ट में 1000 ब्लॉक तक उत्पादन करती है।

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