– एक्टिवा पर पीछे चुनाव चिन्ह सिलेंडर तो आगे माइक बांध कर किया प्रचार
– न एक समर्थक आगे और न एक समर्थक पीछे, फिर भी सत्ता से टकराने का जुनून
लोकतंत्र की एक बड़ी खूबी है कि इसके केंद्र में व्यक्ति है। इस व्यक्ति को एक किताब ने, जिसे हम संविधान कहते हैं, अधिकार दिया है कि लोकतंत्र के नाच यानी चुनाव में प्रतिभाग कर सकता है। इसमें उसकी माली या शैक्षणिक हैसियत नहीं देखी जाती। कुछ लोग नामांकन के समय सपोर्टर के तौर पर आ जाएं। बस, फिर वो चाहे, वो दें या न दें।
लोकतंत्र में चुनाव महंगा हो गया है और वोट सस्ता। कोई भी 500 में बिक जाता है तो कोई वादों में तो कोई निष्ठा में। ऐसे में एक पत्रकार राजेंद्र गैरोला देहरादून नगर निगम से मेयर प्रत्याशी हैं। सुमन नगर में रहते हैं। 6 चुनाव पहले हार चुके है और सातवां हारने की तैयारी में हैं। आप उन्हें उत्तराखंड के भावी धरती पकड़ कह सकते हैं, लेकिन सत्ता और संसाधनों से टकराने का जो साहस और हौसला उनमें है,उसकी दाद देनी पड़ेगी।
अकेले-अकेले चुनाव प्रचार किया। स्कूटी के पीछे चुनाव चिन्ह गैस सिलेंडर बांधा, उस पर लिखा, मेयर प्रत्याशी और आगे एक माइक लगाया और बदलने चले दून वैली।
चुनाव परिणाम जो भी हो पर बंदे के हौसले को सलाम। यह हिम्मत का काम है।

